साईंया साईंया दर्श दिखादे सोहनियाँ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

साईंया साईंया साईंया साईंया,

दर्श दिखादे सोहनियाँ दुरो चल के संगता आइय,

ढोली ढोली ढोली ढोली,

अज मैं मलंग बनके पौनी साईं दे नाम दी बोली,

बेरी बेरी बेरी बेरी,

भगत तू बन साईं द्वारा खुल जाऊ किस्मत तेरी,

धड़ेगदिरे वालियां मैं कहनी आ,

साईं दे नाम दी माला मैं जापदी रहनी आ,

मेला मेला मेला मेला नाच ले तू साईं दर ते,

फिर कद औना है वेला,

कोले कोले कोले कोले,

मस्ती दे विच नचदे भगती दे विच तेरी भोले,

तू की जाने साईं मेरा की करदा,

बिन मंगे ही साईं झोली है भरदा,

मांजा मांजा मांजा मांजा,

आजा आजा साईं वे असी हीर ते तू सडा राँझा,

रमली रमली रमली रमली,

आज मैं खूब नचना बनके साईं दी कमली,

चेला चेला चेला चेला,

किना सोहना आज लगाया वेखो साईं दे ना दा मेला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।