मैनु कमली न चज माये आ गया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैनु कमली न चज माये आ गया,

जदो दी तेरे लरह लग गई,

तेरे नाम वाला झोला गल पा लिया,

जदो दी तेरे लरह लग गई,

किसे दा सी हासा मैं ता किसे दा मजाक सी,

रहा दी मैं ख़ाक सिर पौंदी अपने आप सी,

मैं ते जून जोगी हो गई मेरी दातिए माँ,

जदो दी मेरी झड़ लग गई,

मैनु कमली न चज माये आ गया,

जदो दी तेरे लरह लग गई,

तेरे नाम विच मन ऐसा रंगिया कखा तो मैं लख हो गई,

अखा खुलियां जदो सी मैं तकियाँ रेहमता दी छत हो गई,

मैनु वसदी न देख मेरी दातिए काइयाँ दे दिल तड लग गई,

मैनु कमली न चज माये आ गया,

जदो दी तेरे लरह लग गई,

मेरी बोल चोल सब बदली बदलियां रंग ढंग आ,

तेरे प्यार विच नचदी दे गौंदी लोका भाने चढ़ी भंग ए,

इसा जादू किता सोढ़ी भगत ते बोलने सिर चढ़ लगदी,

मैनु कमली न चज माये आ गया,

जदो दी तेरे लरह लग गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।