लोको मैं फ़कीर साई दा,

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओह्दी फोटो वाली माला गल पाके,

ओहदे नाम वाली जोत जगा के,

लोको मैं फ़कीर साई दा,

मैं हो गया फ़कीर साई दा,

इश्क़े दा ओहदे मैनु रंग चढ़ गया है,

सदा ले मैं साई जी दा पला फड् लिया है,

जाना होर दे न दर ओहदे जाके सदा रखना मैं दिल च वसा के,

लोको मैं फ़कीर साई दा,

मैं हो गया फ़कीर साई दा

रजा विच साई जी दे दुःख सुख सहना है,

रेहमता दी खैर हूँ मंगदे रहना है,

ओहदे दर उते अलख जगा के झोली रखनी मैं सदा फैला के.

लोको मैं फ़कीर साई दा,

मैं हो गया फ़कीर साई दा

रोम रोम विच ओह्दी प्रीत रच गई है,

अँखियाँ स सोहनी तस्वीर वस् गई है,

महिमा साई जी दी बेली तो लिखा के,

राके संस कहंदा महिमा गा गा के,

लोको मैं फ़कीर साई दा,

मैं हो गया फ़कीर साई दा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।