हमने जाना कहा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हमने जाना कहा,

हम ने जाना शिरडी द्वार रे उसकी महिमा है अप्रमपार रे,

जिस पत्थर पे तू था विरजा उस पे झुकते रंक और राजा,

हर पीड़ा से मिल जाये मुक्ति सबका बेडा पार रे,

हमने जाना कहा..........

तेरा द्वारा जितना न्यारा हर मजहब को उतना ही प्यारा,

भेद भाव नहीं दीन धर्म में,

तेरा ये उपकार रे,

हमने जाना कहा......

जीवन है माटी की गागर दुनिया है एक गेहरा सागर,

लेहरे उठती है तूफानी तू सबका खेवन हार रे,

हमने जाना कहा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।