मुझे खाटू भुला लेना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुझे ओ सँवारे करुणा की गंगा में बहा लेना,

मैं जब लू आखरी सांसे,मुझे खाटू भुला लेना,

भुजे जब दीप नैनो के छवि इनमे तुम्हारी हो,

ना हो मेला ज़माने का प्रभु हो और पुजारी हो,

निभाई आज तक जैसे बस इसे ही निभा लेना,

मैं जब लू आखरी सांसे,मुझे खाटू भुला लेना,

पिता तुम हो तुम्ही माता तुम्ही बेहना भाई हो,

ओ सांवरिया तुम्ही पेहली तुम्ही अंतिम कमाई हो,

तुम्हे मैं चाहता हु अपने हिर्दय में छुपा लेना,

मैं जब लू आखरी सांसे,मुझे खाटू भुला लेना,

गवा दी ज़िंदगी मैंने ज़माने से निभाने में,

कभी हसने हँसाने में कभी रोने रुलाने में,

बचे बाकि जो पल चाहु मैं तेरे संग वीता लेना,

मैं जब लू आखरी सांसे,मुझे खाटू भुला लेना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।