जय अम्बे जगदम्बे माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जग की रचना रचना वाली तेरे हाथ हज़ार,

इस भाव सागर में है तेरे नाम से बेडा पार।

मनमे पाप कपट को लेकर बंद शीश झुकाए,

फिर भी तेरे द्वार से माता खाली कोई ना जाए॥

जय अम्बे जगदम्बे माता, जय अम्बे।

पौना वालिए, ज्योता वालिए, नी मैं आई तेरे द्वारे॥

तेरी मर्जी से चलता है जग संसार यह सारा,

पाप का भागी बनता है फिर क्यूँ इंसान बेचारा।

मूर्ख गायनी और लुटेरे, सब हैं खेल खिलोने तेरे,

किस को छोड़े किस को घेरे तेरे हैं रंग नयारे॥

गूंग रही हूँ दिल के टुकड़े, माथे का सिंधूर,

कौन करे ए माता मेरे कष्ट तेरे बिन दूर।

दुखिओं के वर्लाप भी देखे, धनिओं के परताप भी देखे,

दुनिया के पाप भी देखे, तू मेले बिछड़े सहारे॥

भक्त जानो की बीड़ भी है और फिरते हैं दरबार,

आगे बड़ कर कैसे ले लूँ माता का वरदान।

सब की विपता हरने वाली, सब पर कृपा करने वाली,

सब की झोली भरने वाली, मुझ को भी रास्ता दिखादे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।