कर न सका मैं तेरी पूजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कर न सका मैं तेरी पूजा किस्मत ही कुछ ऐसी थी,

जीती भाजी हार गया मैं कीमत ही कुछ ऐसी थी,

अपनी अपनी किस्मत है ये फूल किसी को खार मिले,

मुझको मिला जो दर तेरे से नेहमत ही कुछ ऐसी ही थी,

जीती भाजी हार गया मैं ....

दिल बहलाने को गम मिल गए है,

आंसू रोज बहाने को,

बहते आंसू काम ना आये,

चाहत ही कुछ ऐसी थी मेरी,

जीती भाजी हार गया मैं......

दम से गए हम दम ओ रंगीले हम दम भी मिल पाए ना,

सागर तट पर टेसी प्यासा नीयत की कुछ ऐसी थी,

जीती भाजी हार गया मैं.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।