पिंडा विचो पिंड सुनी दा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो,

राधा रमण हरी गोविन्द बोलो.

पिंडा विचो पिंड सुनी दा खेडा,

उस दियां दो कुढ़ियाँ पूछन श्याम दा घर है केहडा,

मोर मुक्त मथे तिलक विराजे हाथ मखाना दा पेडा,

बंसी बजा श्यामा दिल नही लगदा मेरा

पिंडा विचो पिंड सुनी दा खाड़ी,

उस दियां दो कुढ़ियाँ सी एक रुक्मण राधा प्यारी,

रुक्मण दा सी विवहा हो गया राधा अजे कवारी,

आपे ले जान गे आके कृष्ण मुरारी,

पिंडा विचो पिंड सुनी दा नन्द गाव,

उस दियां दो बाल सुनी दे कृष्ण ते बलराम,

ओ दर्शन करके मैं खिल उठियाँ हो गए चारो धाम,

लेके हरी दा नाम दुनिया तर गई है,

पिंडा विचो पिंड सुनी दा खेडा,

मैं ता तेरी होगी श्याम तू वी होजा मेरा,

बंसी बजा श्यामा दिल नही लगदा मेरा,

पिंडा विचो पिंड सुनी दा सेहरा,

मोह माया विच फस दी जावा पार लगादे वेह्डा,

जल्दी आ श्यामा मैं तेरी तू मेरा ,

गोविन्द बोलो गोपाल बोलो,

राधा रमण हरी गोविन्द बोलो.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।