कहंदे आ रहना

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॥ पावन पाठ ॥

कहंदे आ रहना खैर तेथो लैना आ,

तेरे बाजो तेरे बाजो दस होर किह्नु कहना,

कहंदे आ रहना.....

तेरा दरबार है आली मोडियाँ कोई नहीं खाली,

खाली झोली भर दे झोली,

तेरे दर तो नई मैं जाना,

कहंदे आ रहना......

तेथो मंगना नई संघना गैरां तो मूल नहीं मंगना,

मंगा जे गेरा तो,

तेरा मंगता किने कैहना,

कहंदे आ रहना ......

जी करे कोल बैठा रवा बैठा बैठा मैं तक दा रबां,

तेरा मिलना मैं रब दा मेल केहना ।

कहंदे आ रहना ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।