नीले आकाश पे रहने वाले

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॥ पावन पाठ ॥

नीले आकाश पे रहने वाले, अपनी छाया में हमको छिपा ले,

हम खिलोनों के बस में ही क्या है, जैसे मर्जी है तेरी नाचाले।

सुख पे झपटा है दुःख का अँधेरा, आज बदीओं ने नेकी को घर,

फूल कांटो ने घायल किए हैं, बुझ गए आस के सब दीए हैं।

सुनले जग के मसीहा निराले, अपने बन्दों को गम से छुडा ले,

हम खिलोनों के बस में ही क्या है, जैसे मर्जी है तेरी नाचाले॥

दम फरिश्तों का अब घुट रहा है, बेकसूरों का ही घर लुट रहा है,

डर के छुरिओं पे चलना पड़ा है, हम को बेमौत मरना पड़ा है।

दस्ते जुल्फों के हैं नाग काले, आजा अब तो जरा रहम खाले,

हम खिलोनों के बस में ही क्या है, जैसे मर्जी है तेरी नाचाले॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।