मेरे अंसियो को देखे

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे अंसियो को देखे यहाँ कौन साई बाबा,

बेह्ते है साई ये तो इनहे तुम तो पौंचो बाबा,

मेरे अंसियो को देखे.....

मेरी छोटी सी आखियो में आंसू कहा से आये,

दर्द क्या है मुझको कोई पड़ना ही न चाहे,

तुमने भी अपने नज़रे क्यों फेर ली है बाबा,

बेह्ते है साई ये तो इनहे तुम तो पौंचो बाबा,

मेरे अंसियो को देखे.....

कई वार मैंने सोचा मैं शिरडी आउ बाबा,

तेरा साई मुझको पर आया न भुलावा,

कैसे दिखाऊ आंसू जब तक मिलो न बाबा,

बेह्ते है साई ये तो इनहे तुम तो पौंचो बाबा,

मेरे अंसियो को देखे.....

तुमने तो साई जैसे दीये भी थे जलाये,

मैं जल रहा बिरहा में मेरे पास भी ना आये,

विश्वाश है अब मुझको बस तुम पे ही बाबा,

बेह्ते है साई ये तो इनहे तुम तो पौंचो बाबा,

मेरे अंसियो को देखे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।