गैया तेरा हाल देख के

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गैया तेरा हाल देख के मन मेरा भर आये जग की पालनहारी माँ,

दर दर की ठोकरे खाये गैया तेरा हाल देख के...

जिस बालक की बाना हो तुम उसकी माँ बन जाती,

पाल पोस कर उसको जग में जीने योगये बनाती,

करती वो एहसान जो कभी उतर नहीं पाती,

गैया तेरा हाल देख के...

पी कर दूध छोड़ देते है पापी जग के बन्दे,

मतलब खोर ज़माने वाले हुए अकल के अंधे,

इतनी ममता बरसा कर भी खुद प्यासी रह जाए,

गैया तेरा हाल देख के.......

डफलात में सोने वालो कुछ अपने होश संभालो,

गैया माँ की सेवा करके अपने भाग्य बनालो,

रोता है पाली का दिल जब गैया नीर भहाये,

गैया तेरा हाल देख के.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।