देखो रे देखो पालकी चली है साईं नाथ की

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

देखो रे देखो पालकी चली है साईं नाथ की,

सजधज के बेठे जिसमे श्रृष्टि के नाथ जी,

झूमो नाचो गाओ ढोल ताशे बजाओ,

आके देख देख टपकी न साईं के ठाठ जी,

देखो रे देखो पालकी चली है साईं नाथ की,

भक्तो ने देखो कैसे पालकी बनाई है,

रंग भिरंगे फूलो की झालर लगाई है,

रकत बनके कहा रे खुद को समजे है राजा,

कही भाजे शहनाई और कही बाजा,

फूलो से अति पड़ी शिरडी की राहे,

एक नजर साईं को सब देखना चाहे,

अरे आख जो रही तेरी बाँट जी,

देखो रे देखो पालकी चली है साईं नाथ की,

देवी देव अरसो से करते नमन है खुशियों से झूम रहे अज सबके मन है,

गली गली नगर नगर धूम मची है भक्तो संग गुम रहे द्वारका पति है,

साईं नाम के बस गूंजते जयकारे एक झलक साईं की किस्मत सवारे,

भिग्ड़े बने सारे काम जी

देखो रे देखो पालकी चली है साईं नाथ की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।