कहा छुप गया तू कहा तुझको धुंडु

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कहा छुप गया तू कहा तुझको धुंडु ओ मेरे मन के मीत,

मन वीणा की टूटी है तारे विखरा मेरा संगीत,

ओ मेरे मन के मीत,

क्या थी वो राते जिन रातो में गीत तुम्हरे गाये थे,

सात सुरो की खुशबु से उन गीतों को महकाये थे ॥

ना जी सकूगा न मर सकूगा मेरी रह गई अधूरी प्रीत,

ओ मेरे मन के मीत,

चुन चुन भावो की कलियों से तुझको कभी सजाया,

बिन बोले ही प्रीतम प्यारे कभी दिल का दर्द सुनाया ॥

धुंटने लगा है गम प्राणो का ये सवासे भी जाए भी,

ओ मेरे मन के मीत,

गम देने वाले दर्द ये दिल का मुश्किल हुआ अब सेहना,

दिल की दिल में रह गई मेरे अब तुमसे नहीं कुछ कहना ॥

देखेगी दुनिया महौब्त उनकी हारी आ गई जीत,

ओ मेरे मन के मीत,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।