शिरडी जैहा द्धारा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी जैसा द्वारा होर नहियो होना,

दुखियां दा सहारा होर नहियो होना,

सारी दुनिया तो न्यारा सब दे दिला दा प्यारा होर नही होना,

शिरडी जैसा द्वारा होर नहियो होना,

जेह्डा आया दर ओहदे ते कदे ना खाली जावे,

कटे जनम जन्म दे दुखड़े ओ सारे सुख भावे,

भुला नु एह बक्सन हारा,

और नहियो होना,

शिरडी जैसा द्वारा होर नहियो होना,

दुनिया दे द्वारा नालो ऊचा दिखदा द्वारा,

इसदी चोकठ आगे आके झुकदा जग सारा,

जलवा मेरे साईं जी दा बड़ा मनमोहना,

शिरडी जैसा द्वारा होर नहियो होना,

साईं दे दर जाके दर्शन किस्मत वाले करदे,

दुनिया दे सुख पाके गिरदर भवसागर तो तरदे,

अपनी दया दे नाल है करदा मिटटी नु वी सोहना,

शिरडी जैसा द्वारा होर नहियो होना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।