कान्हा मोरी गलियों आया न करो

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मोरी गलियों आया न करो,

मीठी मीठी बाँसुरी बजाया न करो,

मन नहीं माने कान्हा बांसुरी बजायेलो,

मेरा नाम बांसुरी पे गया ना करो,

मीठी मीठी बाँसुरी बजाया न करो,

मन नही माने कान्हा नाम भी गाये लो,

मोरे कान्हा मुझे यु बुलाया न करो,

मीठी मीठी बाँसुरी बजाया न करो,

मन नही माने कान्हा नाम भी गाये लो,

मोहे कान्हा यु बुलाया न करो,

मीठी मीठी बाँसुरी बजाया न करो,

मन नही माने कान्हा मोहे भुला लू,

अतिशीघ्र की कान्हा फिर जायो ना करो ,

मीठी मीठी बाँसुरी बजाया न करो,

मन में तू आये कान्हा दिल में छिपाए लू,

दिल में छिपा के फिर बताया न करो

मीठी मीठी बाँसुरी बजाया न करो,

कान्हा मेरी गलियन आया न करो।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।