कान्हा मोरे नाहीं कहुँ मोहें ठौर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा मोरे नाहीं कहुँ मोहें ठौर:

श्री कृष्ण: शरणम् मम्,

श्री कृष्ण: शरणम् मम् ।

कान्हा मोरे नाहीं कहुँ मोहें ठौर,

चरण शरण अब आय तिहारो,

तुम बिनु कोऊ न और,

कान्हा मोरे नाहीं कहुँ मोहें ठौर----।

मन अधीर तव दरस को तड़पै,

जैसो चितवत चंद चकोर,

कान्हा मोरे नाहीं कहुँ मोहें ठौर.......

छाड़ि दोष लीजै मोहें चरनन,

भयो हिय भाव विभोर,

कान्हा मोरे नाहीं कहुँ मोहें ठौर....

राग द्वेष मिथ्या जग तजि अब,

हरि चाहूँ भक्ति तोर,

कान्हा मोरे नाहीं कहुँ मोहे ठौर ....

श्री कृष्ण: शरणम् मम् ,

श्री कृष्ण: शरणम् मम्

आभार; ज्योति नारायण पाठक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।