ओ दुनिया के रखवाले

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॥ पावन पाठ ॥

भगवान भगवान भगवान भगवान

ओ दुनिया के रखवाले,

सुन दर्द भरे मेरे नाले,

आश निराश के दो रंगों से, दुनिया तूने बनायी,

नैया संग तूफ़ान बनाया, मिलन के साथ जुदाई,

जा देख लिया हरजाई,

हो लूट गयी मेरे प्यार की नगरी अब तो नीर बहा ले,

ओ दुनिया के रखवाले..

आग बनी सावन की बरखा, फूल बने अंगारे,

नागन बन गयी रात सुहानी, पत्थर बन गए तारे,

सब टूट चुके हैं सहारे,

हो जीवन अपना वापस ले ले जीवन देने वाले,

ओ दुनिया के रखवाले........

चाँद को ढूंढें पागल सूरज, शाम को ढूंढें सवेरा,

मैं भी ढूंढूं उस प्रीतम को, हो न सका जो मेरा,

भगवान भला हो तेरा,

हो किस्मत फूटी आस न टूटी पाँव में पड़ गए छाले,

ओ दुनिया के रखवाले.........

महल उदास और गलियां सुनी चुप-चुप हैं दीवारे,

दिल क्या उजड़ा दुनिया उजड़ी, रूठ गयी हैं बहारे,

हम जीवन कैसे गुजारें,

हो मंदिर गिरता फिर बन जाता दिल को कौन संभाले

ओ दुनिया के रखवाले ......

Suresh Kumar khoda

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।