लगी है प्रीत तेरे नाल मेरी सोहनियां

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॥ पावन पाठ ॥

सोहना लाज पाल मेरा जांदा हाल वे,

हर पल रखदा मेरा ओ ख्याल वे,

लगी है प्रीत तेरे नाल मेरी सोहनियां,

लिखी गई हूँ तेरे नाम मेरे सोहनियां,

नजारा च वेख तेरी मिलदा सकूं वे,

तेरे दर उते रेह्न्दा लगाया हजूम वे,

मस्ती दा तेरी पीता जाम मेरा सोहनियां,

लिखी गई हूँ तेरे नाम मेरे सोहनियां,

सारी जिंदगी मैं तेरे नाल रह के जीनी है,

हर गाल दिल दी मैं तनु आख देनी है,

सुबह तू मेरी तू ही शाम मेरे सोहनियां,

लिखी गई हूँ तेरे नाम मेरे सोहनियां,

रब तनु मनिया है गल तू वी जांदा,

गेरा किठो करियाँ है पीर उची शान दा,

खुल गए नसीब होये गुलाम मेरे सोहनियां,

लिखी गई हूँ तेरे नाम मेरे सोहनियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।