विनती सुनलो मेरे साई

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॥ पावन पाठ ॥

विनती सुनलो मेरे साई मैं भी दर तेरे आयी,

मेरा जग में ना कोई देदो मुझको एक भाई,

विनती सुनलो मेरे साई मैं भी दर तेरे आयी,

तेरे जहा में साई कोई न मेरा कैसे बचाऊ खुद को आसरा तेरा,

मेरी लाज बचाओ जैसे दारोपती की बचाई,

विनती सुनलो मेरे साई मैं भी दर तेरे आयी,

दुनिया लुटेरी भरोसा किस पे करू,

बस में न कुछ में उठ के रोती फिरू,

मेरी झोली न भरी तो होगी जग में हसाई,

विनती सुनलो मेरे साई मैं भी दर तेरे आयी,

गम की हु मारी मुझे और न रुलाओ,

आके आख पोंछो मेरे भाई बनके आओ,

गोद ताणु किरण की गोद नीतू शिवडी की खेले छोटा सा कन्हाई,

विनती सुनलो मेरे साई मैं भी दर तेरे आयी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।