भक्तो चलो गाते चलो शिरडी चलो

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॥ पावन पाठ ॥

भक्तो चलो गाते चलो शिरडी चलो बाबा ने भुलाया चलो शिरडी चलो रे,

हमें साई का संदेसा कुछ ऐसे मिला रे कल सपने में बाबा का फूल खिला रे,

सपने में देखा मैंने शिरडी प्यारा रे,

बाबा ने भुलाया चलो शिरडी चलो रे,

साई उधि से भक्तो के रोग हरे रे,

जो शिरडी बस जाये उसे पुण्य मिले रे,

सपने में साई सबको भुलाये रे,

साई ने भुलाया चलो शिरडी चलो रे,

बिना तेल के साई ने दीये जलाये रे,

बिछड़े हुए दिलो को साई मिलाये रे,

सपने में साई बड़ा प्यारा लगे रे,

बाबा ने भुलाया चलो शिरडी चलो रे,

ये सपने तो ऐसे गुजर जायेगे,

अब भक्तो को लेके हम शिरडी आएंगे,

काकड़ साई आरती हम मिलके गायेगे,

बाबा ने भुलाया चलो शिरडी चलो रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।