मेरे साई मेरे साई करदे मेरी नैया पार

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे साई मेरे साई करदे मेरी नैया पार,

तोड़ के सारे बंधन अब तो आये हम तेरे दवार,

मेरे साई मेरे साई करदे मेरी नैया पार,

तू है किरपा सिधु तू दानी साई तू है बड़ा महान,

अपने भक्तो का तो अब तक तूने किया सदा कल्याण,

श्रद्धा से हम शेष झुकाये तेरे आगे बारम बार,

मेरे साई मेरे साई करदे मेरी नैया पार,

अब तो यही है अभिलाषा बस हम तुम को सदा निहारे,

आके दर्श दिखाना हमको जब भी मन से तुम को पुकारे

तेरा भेद न जाने कोई तेरी लीला अप्रम पार,

मेरे साई मेरे साई करदे मेरी नैया पार,

हम है दीं दुखी और निर्बल हूँ को तेरा एक सहारा ,

तू है दया बाण हम सबका सारे जग का पालनहारा,

तू दुःखवजन कष्ट निवारक तू ही श्रिस्ति करा,

मेरे साई मेरे साई करदे मेरी नैया पार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।