तेरे द्वारे यही अरदास है

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे द्वारे यही अरदास है मेरी छोटी सी साई ये आस है,

मुझे देदो भभूती एक चुटकी,

सोना चांदी नहीं मेरी आशा हीरे मोती की ना ही अभिलाषा,

मुझे देदो भभूती एक चुटकी,

साई सिद्धि साई

मुझे देदो भभूती एक चुटकी....

तेरे दर पे जबसे सिर झुका साई जीवन में कोई दुःख ना रहा,

बिन मांगे सब कुछ पाया,

मेरे दर की बदली सब काया,

जिस पथ पे यहाँ भी मैं जाऊ मैं दिन रात यही गाउ,

मुझे देदो भभूती एक चुटकी......

बसे नैनो में सूरत तेरी मन मंदिर में मूरत है तेरी,

इन सांसो में तेरा वसेरा और तेरे सिवा कौन मेरा,

तेरे नाम की माला जप के तेरी धुनि में बनी है जो तपके,

मुझे देदो भभूती एक चुटकी.......

तेरी पूजा मैं जब भी करू इसे श्रद्धा से माथे धरु,

मुझे शांति ये देती निराली मिठे अन्धकार होती है दिवाली,

और दुनिया में है न मत ऐसी सुखदाई संजीवनी जैसी,

मुझे देदो भभूती एक चुटकी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।