ओढली साई नाम की चादर ओढली,

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॥ पावन पाठ ॥

ओढली साई नाम की चादर ओढली,

दुनिया के रिश्तो से मैंने प्रीती तोड़ ली,

ओढली साई नाम की चादर ओढली,

चाहे मेरे अपने मुझसे ही रूठे,

अब ये चदरियाँ तन से न छूटे,

दीवारे सारी हमने दुनिया की तोड़ दी,

ओढली साई नाम की चादर ओढली,

साई कोई मेरा संगी ना साथी,

मतलब के है सारे बाराती,

जीवन की नैया साई नाम से जोड़ ली,

ओढली साई नाम की चादर ओढली,

साई दर्शन बिन कुछ नहीं भावे,

हर पल बाबा तेरी याद सतावे,

श्रद्धा और सबुरी से मैंने प्रीत जोड़ ली,

ओढली साई नाम की चादर ओढली,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।