जागो हे साईं नाथ सो गए हो तुम

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॥ पावन पाठ ॥

पत्थर के बनके पत्थर दिल क्यों हो गए हो तुम,

जागो हे साईं नाथ सो गए हो तुम,

कहते थे तुमको हरपल भगतो के साथ हो,

हो दूर चाहे जितना भी पर उनके पास हो दर दर भटकता हु मैं,

कहा खो गए हो तुम, जागो हे साईं नाथ सो गए हो तुम

चड्ते हुए तूफ़ान भी तुमसे है खौफ खाते,

गहरे भवर भी तेरे आगे है सिर झुकाते,

जिस कश्ती के खावैयाँ साईं हो गए हो तुम,

जागो हे साईं नाथ सो गए हो तुम

ना आस मेरी टूटे गी एस्सास है मुझे,

जाऊ गा न निराश ये विश्वाश है मुझे,

मेरे साथ हर पल हो गए हो तुम,

जागो हे साईं नाथ सो गए हो तुम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।