नन्द के आनंद भयो जय कन्हिया लाल की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।

गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।

गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

पूनम के चाँद जैसी शोभी है बाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

भक्तो के आनंद्कनद जय यशोदा लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो यशोदा लाल की, जय हो गोपाल की।

गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनद से बोलो सब जय हो बृज लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो बृज लाल की,पावन प्रतिपाल की।

गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की।

नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।