कब आउगे मेरे तुम साईं

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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी तेरी तुझको पुकारे कब आओगे मेरे तुम साईं,

क्यों आने में देर लगाई कब आउगे मेरे तुम साईं,

दर्द से धरती डोल रही है,

पाप पुनाये को तोल रही है,

मेरी शिरडी बोल रही है मन में जोत समाई,

कब आउगे मेरे तुम साईं

सांच सवर के टूटे धागे,झूठ कपट है सब से आगे,

अंधकार में फसा है मानव कौन करे रोशनाई,

कब आउगे मेरे तुम साईं...

पानी से जो दीप जलाये,

सबका मालिक वो कहलाये,

दारा को जी मीत तो चाहे तेरे चरणों की परछाई,

कब आउगे मेरे तुम साईं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।