झूठी माया काया पर

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॥ पावन पाठ ॥

झूठी माया काया पर क्यों इतना करे गुमान,

माटी तेरा मूल है बन्दे कर्म तेरी पहचान,

उची पगड़ी बांध के मूरख दिखलाये क्यों शान,

जिस को चाहे बाबा साई उसको मिले सम्मान,

राजा हो जा रंक हो कोई निर्धन या धनवान,

साई के दरबार में सारे बन्दे एक समान,

दिल को न तोड़ो पाप लगेगा दिल में वसे भगवान,

युग युग से यही पाठ पढाये गीता और कुरान,

झूठी माया काया पर क्यों इतना करे गुमान,

माटी तेरा मूल है बन्दे कर्म तेरी पहचान,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।