मेरा शिरडी वाला बड़ा है दयाला

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा शिरडी वाला बड़ा है दयाला,

कभी भी सवाली को खाली न टाला

मेरा शिरडी वाला बड़ा है दयाला,

चलो चलो शिरडी में बिगड़ी बनेगी,

बिन मांगे झोली वही से बरेगी,

हौआ जो भी साई के कदमो में हाजिर,

वो दीवाना साई का तकदीर वाला,

मेरा शिरडी वाला बड़ा है दयाला,

यहाँ भी किसी ने मुझे है रुलाया,

मेरे साई ने है गले से लगाया,

यहाँ जिसने साई को आवाज दी है,

उसे शिरडी वाले ने आके संभाला,

मेरा शिरडी वाला बड़ा है दयाला,

नीम को भी साई ने मीठा बनाया,

बिक्शा की रोटी पे जीवन बिताया,

दिया रब ने इनको कुछ ऐसा खजाना,

मेरा साई बाबा बड़ा रेहम वाला,

मेरा शिरडी वाला बड़ा है दयाला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।