ये साई धाम है ये साई धाम है,

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॥ पावन पाठ ॥

झोली भरता यहाँ आके संसार है,

ये साई धाम है साई धाम है,

पूरी करता मुरादे जो हर बार है ये साई धाम है हा साई धाम है,

सच है साई रेहमत की तस्वीर है,

हर दम दयालु रहे साई वो पीर है,

चौकठ पे आके जो सिर को झुकाये पल भर में उसकी बदले ये तकदीर है,

यहाँ बिगड़ा हुआ बनता हर काम है,

ये साई धाम है ये साई धाम है,

बाबा से मैंने जो आस लगाई,

सजदा काबुल किया बात है बनाई,

जितना था मंगा मैंने जयदा ही पाया साई ने आके मेरी लाज बचाई,

अब तो जीवन मेरा साई के नाम है,

ये साई धाम है हा ये साई धाम है,

नादा है अश्क जो भी बहाये,

बाबा ने रेहमत के है ढेर लगाए,

दमन भी छोटे पड़े साई के द्वार पे साहिल को देखो वो भी पहला न समाये,

मेले लगते या सुबह और शाम है

ये साई धाम है ये साई धाम है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।