सँवारे बिन तुम्हारे ये जी ना लगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सँवारे बिन तुम्हारे ये जी ना लगे,

आओ पास हमारे ये जी न लगे,

सँवारे बिन तुम्हारे ये जी ना लगे,

भजन सुनाने तुझको रिझाने आया सँवारे,

तू न सुनो तो किसको सुनौ बोलो सँवारे,

फीके साज है सारे ये जी न लगे,

सँवारे बिन तुम्हारे ये जी ना लगे,

भगतो ने मिल कर दर को सजाया पराये सँवारे,

चाँदनी कसिए बिन चाँद के बोलो सँवारे,

फीके चाँद सितारे ये जी न लगे,

सँवारे बिन तुम्हारे ये जी ना लगे,

कुछ नहीं चहु तुझसे ओ बाबा बस आइये,

सामने मेरे बैठ के बाबा मुस्कुराइए,

नंदू प्रेम पुकारे ये जी न लगे,

सँवारे बिन तुम्हारे ये जी ना लगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।