तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले

पारंपरिक
महादेव भजन साईं भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरी मस्जिदे है तेरे है शिवाले,

तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,

तू मालिक है सबका तू ही सबको पाले,

सभी के लिए है तेरी धुप छाओ,

ये काशी वो कावा है सब तेरे गाँव,

तू धर्मो के बंधन से बिलकुल परे है,

कर्म हिन्दू मुश्लिम सभी पे करे है,

सभी को गमो के ववर से निकले,

तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,

खुदा कोई बोले कहे कोई दाता,

है तेरा तो सारे ज़माने से नाता,

तुझे गैर भी न लगे गैर बाबा,

तू मांगे है सबके लिए खैर बाबा,

तू देता ही देता है कुछ हम से ना ले,

तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,

तू मोहन की मूरत मैं भी दे दिखाई,

अजानो से भी तेरी आवाज आई,

है गीता में उपदेश तेरा ओ साई,

तू गुरवा के कलमो में देता सुनाई,

तुजो चाहे वो रूप पल में बना ले,

तू ही ईश्वर तू अल्ल्हा तू रब शिरडी वाले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।