सच की राहो पे तू हम को चला साई

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॥ पावन पाठ ॥

सच की राहो पे तू हम को चला साई,

सच की राहो पे तू सबको को चला साई,

नेकी की समा हर एक दिल में तुहि जला साई,

ना सोचे दिल से भूरा हम सबका करे भला,

दीं दुखी को गल्ले लगा कर सेवा करे सदा,

तुहि मिटाना सबके संकट,

और भला साई,

सच की राहो पे तू हम को चला साई,

दिशा से कोई अब न भटके सबको देना सहारा,

रेहमत मिले तेरी सबको सबने तुझे है पुकारा,

ऐसे सुखो से संसार सारा तुहि बना साई,

सच की राहो पे तू हम को चला साई,

इतनी सी अरदास साई मैं कुछ और न मांगू,

निर्मल पवन मन हो सबका साई ये मैं चहु,

शरधा सबुरी मंतर सीखा कर किरपा करू साई,

सच की राहो पे तू हम को चला साई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।