॥ पावन पाठ ॥
भोले बाबा ने यु ही बजाया डमरू,
सारा केलाश पर्वत मगन हो गया,
यहाँ ब्रह्मा चले वहा विष्णु चले,
माँ लक्ष्मी का मन भी मगन हो गया,
भोले बाबा ने यु ही बजाया डमरू,
सारा केलाश पर्वत मगन हो गया,
यहाँ सूरज चले वाहा चंदा चले,
वाहा तारो का मन भी मगन हो गया,
भोले बाबा ने यु ही बजाया डमरू,
सारा केलाश पर्वत मगन हो गया,
यहाँ राम चले सीता लक्ष्मण चले,
वाहा हनुमत का मन भी मगन हो गया,
भोले बाबा ने यु ही बजाया डमरू,
सारा केलाश पर्वत मगन हो गया,
यहाँ कृष्ण चले वहा राधा चले वहा मीरा का मन भी मगन हो गया,
भोले बाबा ने यु ही बजाया डमरू,
सारा केलाश पर्वत मगन हो गया,