साई तेरे कर्म की बरसात हो रही

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॥ पावन पाठ ॥

साई तेरे कर्म की बरसात हो रही,

बाबा तेरे कर्म की बरसात हो रही,

रेहमत सवालिया पे दिन रात हो रही है,

तेरे रेहम के छींटे हर और लग रहे है,

सदियों से सोये ये जो वो नसीब जग रहे है,

कुटियाँ गरीब की भी आबाद हो रही है,

साई तेरे कर्म की बरसात हो रही,

जब से सुने है हमने तेरे वचन ओ बाबा,

शिरडी सा हो गया है पावन ओ मन बाबा,

पापो से आत्मा ये आजाद हो रही है,

साई तेरे कर्म की बरसात हो रही,

भक्तो से मिलने मोहन तुम बनने के आये साईं,

तुम में झलक है शिव की शवि राम की समाई,

घर घर में आज कल ये बस बात हो रही है,

साई तेरे कर्म की बरसात हो रही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।