जद मैं नाम सुरमा दा पाया मेरी अख खुल गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जद मैं नाम दा सुरमा पाया मेरी अख खुल गई,

मेरी अख खुल गई सारा जग भूल गई,

जद मैं नाम दा सुरमा पाया मेरी अख खुल गई,

जद मैं गई गुरा दी शरणी माथा टेका दिग पाई चरनी,

ओथे होगी गुरा दी करनी,

मेरी अख खुल गई,

जद मैं गई गुरा दे द्वारे मिले राधा स्वामी सारे,

जागे सुते कर्म ने मेरे मेरी आँख खुल गई,

जद मैं नाम दा सुरमा पाया मेरी अख खुल गई,

जग मैं गई गुरा दे डेरे झगडे सारे मुख गए मेरे,

कट गए चुरासी वाले गेडे मेरी आँख खुल गई,

जद मैं नाम दा सुरमा पाया मेरी अख खुल गई,

जग मैं गुरा दा लंगर खादा मेरे घर विच हो गया वादा,

मेरा जीवन हो गया सादा मेरी आँख खुल गई,

जद मैं नाम दा सुरमा पाया मेरी अख खुल गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।