नैया पड़ी मझदार

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॥ पावन पाठ ॥

नैया पड़ी मझदार,

गुरु बिना कैसे लगे पार।

मैं अपराधी जनम को, मन में भरा विकार,

तुम दाता दुःख भंजना, मेरी करो संभार।

अवगुण दास कबीर के बहुत गरीब नवाज,

जो मैं पूत कपूत हूँ, तहूँ पिता की लाज॥

साहिब तुम मत भूलियो, लाख लोग लग जाहीं,

हम से तुमरे बहुत हैं, तुम से हमरे नाही।

अन्तर्यामी एक तुम, आतम के आधार,

जो तुम छोड़ो हाथ प्रभु जी, कौन उतारे पार॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।