अमृत बेला गया

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अमृत बेला गया आलसी सो रहा बन आभागा,

साथी सारे जगे तू न जागा ,

झोलियाँ भर रहै भाग्य वाले, लाखो पतितो ने जीवन सम्भाले

रंक राजा बने, प्रभु रस में सने कष्ट भागा साथी सारे,

अमृत बेला गया.......

प्रभु कृपा से नर तन यह पाया, अलसी बनकर यू ही गवाया

उल्टी हो गई मती, कर ली अपनी छती,

चोला त्यागा साथी सारे,

अमृत बेला गया....

स्वास एक एक अनमोल बीता,

अमृत के बदले वि श को तू पीता,

सौदा घाटे का कर, हाथ माथे पे धर,

रोने लगा साथी सारे जगे,

अमृत बेला गया......

मानव कुछ भी न तूने बिचारा ,

सिर से ऋषियो का रद न उतारा,

गुरु का नाम न लिया,

गंदा पानी पीया बन के कागा,

साथी सारे जगे अमृत बेला गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।