तेरी पन्हा में आया मुझे पन्हा तो दे,

लखबीर सिंह लक्खा
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॥ पावन पाठ ॥

तेरी पन्हा में आया मुझे पन्हा तो दे,

हे साई अपनी कर्म वाली एक निगहा तो दे,

तेरी पन्हा में आया मुझे पन्हा तो दे,

ना कोई आसान उम्मीद है दिल ऊब गया,

गमो के गहरे ववर में मैं बाबा डूब गया,

मैं फिर से जी लू ज़िंदगी की ऐसी चाह तो दे,

तेरी पन्हा में आया मुझे पन्हा तो दे,

बिछड़ रही है मुझि से ही मेरी परसाई,

तू जान कर भी मेरा हाल चुप है क्यों साई,

भटक गया हु मेरी बाबा नई राह तो दे,

तेरी पन्हा में आया मुझे पन्हा तो दे,

ये तेरे साथ जो बंधी है ड़ोर टूटे ना,

मेरे लवो से तेरा नाम रूठे न,

ये तेरा मेरा जो रिश्ता है तू निभाह तो दे,

तेरी पन्हा में आया मुझे पन्हा तो दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।