सोचा होगा मोहन ने शीश लेने को सौ बार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सोचा होगा मोहन ने शीश लेने को सौ बार,

तूने देने में बाबा सोचा न एक बार,

उस पेड़ का हर पता हम से कहता है,

वो दान आज भी आँखों में रहता है,

तुम जैसा न होगा इस दुनिया में दातार,

तूने देने में बाबा सोचा न एक बार,

था बाबा तब भी दानी अब भी तू दानी है,

हारे का साथी तू है भेदो की वाणी है,

बिन सोचे आज भी तू भरता तू भक्तो के भण्डार,

सोचा होगा मोहन ने शीश लेने को सौ बार

तुझे श्याम नाम का बाबा वरदान दे दिए,

कलयुग का देव कहलावे सम्मान दे दिया,

तेरे नाम के जैकारो से गूंजे गा ये संसार,

तूने देने में बाबा सोचा न एक बार

सोचा होगा मोहन ने शीश लेने को सौ बार

गन गान तेरा कर पाउ वो बात नहीं मुझमे,

ये तेरी ही किरपा है क्या बात है तुझमे,

तल जाते है कमल संकट आ कर के तेरे द्वार,

तूने देने में बाबा सोचा न एक बार..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।