कैसे कह दू दुआ बेअसर

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॥ पावन पाठ ॥

कैसे कह दू दुआ बेअसर हो गई,

मैं जो रोया साई को खबर हो गई,

पुहंचे आंसू बाबा ने जब मेरे प्यार से,

दिल तो भर आया आंखे नम होगी,

कैसे कह दू दुआ बेअसर हो गई,

सिर झुका के साई को मैंने चूमे कदम,

कुछ ना बोलै फिर भी बाबा को खबर हो गई,

कैसे कह दू दुआ बेअसर हो गई,

पूछा लोगो ने दर पे साई के क्या मिला,

मैंने बोलै श्रदा सबुरी मिल गई,

कैसे कह दू दुआ बेअसर हो गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।