हम है भक्त बाबा के

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॥ पावन पाठ ॥

हम है भक्त बाबा के क्यों डरे ज़माने से,

वास्ता हमारा है शिरडी के घराने से,

हम है भक्त बाबा के क्यों डरे ज़माने से,

बाबा जब भुलायेगे मैं जरूर जाउगा,

मुझको कौन रोकेगा उसके दर पे जाने से,

हम है भक्त बाबा के क्यों डरे ज़माने से,

हो गया मैं बाबा का बाबा हो गए मेरे,

मेरे जितने दुशमन थे लग गए ठिकाने से,

हम है भक्त बाबा के क्यों डरे ज़माने से,

बाबा के ही चरणों में ज़िंदगी बिताऊगा,

मेरा घर तो पलटा है काम मेरा चलता है,

बाबा के खजाने से,

हम है भक्त बाबा के क्यों डरे ज़माने से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।