मैं दीवाना साई तेरा

लखबीर सिंह लक्खा
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॥ पावन पाठ ॥

मैं दीवाना साई तेरा,

रखना सदा तू ध्यान मेरा,

मैं दीवाना साई तेरा,

आस बंधी है आस ना टूटे,

मुझसे तेरा दरबार न छूटे,

रखना सदा तू मान मेरा,

मैं दीवाना साई तेरा,

साई तेरा नाम निराला श्रद्धा सबुरी देने वाला,

अद्भुत तेरी महिमा देवा गिरते हुयो को तूने संभाला,

बाबा मेरे मन मंदिर में है अस्थान तेरा,

मैं दीवाना साई तेरा.......

दीन दुखी के तुम काम आये बिगड़े सबके काज बनाये,

एक अनेक की शिक्षा दे कर सबको सीधी राह दिखिए,

सबका है तू सबके लिए ही है वरदान तेरा,

मैं दीवाना साई तेरा........

करता रहे लक्खा तेरी भक्ति देना मुझको इतनी शक्ति,

मुझपे सदा हो किरपा तेरी पाता राहु मैं दुःख से मुकति,

तू दानी है तू ज्ञानी है उचा ज्ञान तेरा,

मैं दीवाना साई तेरा.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।