मेरी लाज रखना मेरी लाज रखना

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॥ पावन पाठ ॥

दानी दाता साई बाबा आया दवार तुम्हारे,

जी मांग रहा हु विक्शा तुमसे दोनों हाथ पसारे,

मेरी लाज रखना मेरी लाज रखना,

वैन अँधेरी राह न सूजे दूर बहुत है किनारा,

बीच ववर में नाव पड़ी है कोई न मेरा सहारा,

डगमग ढोले टूटी नैया कौन है पार उतारे,

सिवा आपके ये बालक किसको और पुकारे,

मेरी लाज रखना मेरी लाज रखना,

सबकी विपदा हरने वाले मत चौकठ से टालो,

अपना सेवक जानके बाबा चरणों में अपनालो,

तुमको छोड़कर आखिर जाओ मैं किसके दरवाजे,

तुमसे बढ़कर कौन है जग में ओ दुनिया के राजे,

मेरी लाज रखना मेरी लाज रखना,

भटक चूका हुआ बहुत जगत की खाते खाते ठोकर,

पाऊ बड़ा दो पी जाऊ मैं चरण तुम्हारे धोकर,

शर्मा को मिल जाये बिक्शा जगे भाग्य सितारे,

और किसी के आगे लाख फिर क्यों हाथ पिसारे,

मेरी लाज रखना मेरी लाज रखना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।