दर्दे दिल की दवा दीजिये

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॥ पावन पाठ ॥

हाय मेरा दिल मेरा दिल दिल दिल

साई मेरा दिल मेरा दिल दिल दिल,

दर्दे दिल मेरे बाबा/साई की दवा दीजिये,

कम से कम मेरे साई मुस्कुरा दीजिये,

मेरा दिल आपका घर हुआ मेरे बाबा जी,

इसमें आते आते जाते रहा कीजिये,

ज़ख़्म दुनिया ने मुझको दिए मेरे बाबा,

आप मरहम लगा दीजिये ,

क्या सही क्या गलत क्या पता मैं क्या जानू,

आप ही मेरे साई फैसला कीजिये,

अँधियो में जो न भुज सके मेरे बाबा,

ऐसा दीपक जला दीजिये,

एक समंदर ये कहने लगा बाबा से,

मुझको मीठा बना दीजिये,

आप के नाम से नाम हो बाबा जी,

ऐसा शोहरत हमरासर को अदा कीजिये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।