साई बाबा मेरे दर पे आई

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॥ पावन पाठ ॥

साई बाबा मेरे दर पे आई तेरे आज ऐसा कोई मुझको वर दीजिये,

सोने चाँदी नहीं हीरे मोती नहीं जिसमे मूरत हो तेरी वो घर दीजिये,

तू है दाता जनम के भिखारिन हु मैं तेरे चरणों की सच्ची पुजारन हु मैं,

साई तू मेरा हो दूर अँधेरा हो बस इतनी सी मुझपे मेहर कीजिये,

साई बाबा मेरे दर पे आई तेरे....

रहनुमा सभी पे तू रेहम करता है,

झोलियाँ भक्तो की तू पल में भरता है,

आके तेरी शरण चूमती हु चरण,

मेरी नैया को भाव पार कर दीजिये,

साई बाबा मेरे दर पे आई तेरे,

तू विधाता है साड़ी की कयनाथ का,

साथ जब आप हो दर है किस बात का,

है ये अर्जी मेरी आगे मर्जी तेरी,

अपने भक्तो पे बस एक नजर कीजिये,

साई बाबा मेरे दर पे आई तेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।