खाटू वाले शीश के दानी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

खाटू वाले शीश के दानी मैं तो तेरी हुई दीवानी,

श्याम सवारियां हमने अपनी तेरे नाम लिखी ज़िंदगानी,

खाटू वाले शीश के दानी मैं तो तेरी हुई दीवानी,

हारे का तू सदा सहारा मुझको तेरा सहरा है,

तेरे जैसा और न दूजा तू तो सबसे प्यारा है,

तुझसा भी नहीं लाशानि देख हुई सबको हैरानी,

श्याम सवारियां हमने अपनी तेरे नाम लिखी ज़िंदगानी,

खाटू वाले शीश के दानी मैं तो तेरी हुई दीवानी,

तीन बाण के धरी कहता तुझको सभी ज़माना है,

चक्र खा गए चक्र धरी बाण का देख निशाना है,

जिस पल बाण चला तूफानी तेरी शक्ति कृष्ण ने मानी

श्याम सवारियां हमने अपनी तेरे नाम लिखी ज़िंदगानी,

खाटू वाले शीश के दानी मैं तो तेरी हुई दीवानी,

शीश काट के दान में दियो तुझसे बड़ा ना दानी है,

दानवीर कहलाये जग में कहते ज्ञानी धानी है,

तेरी लीला जिसने जानी हुआ ख़ुशी से पानी पानी,

श्याम सवारियां हमने अपनी तेरे नाम लिखी ज़िंदगानी,

खाटू वाले शीश के दानी मैं तो तेरी हुई दीवानी,

तेरी सूरत पे ये बारी बार बार बलहारी है,

नीले वाले श्याम धानी की महिमा सबसे न्यारी है,

सबके मन की तूने जानी राजा अमर हो गई कहानी,

श्याम सवारियां हमने अपनी तेरे नाम लिखी ज़िंदगानी,

खाटू वाले शीश के दानी मैं तो तेरी हुई दीवानी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।