बड़ा अद्भुत नजारा है

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बड़ा अद्भुत नजारा है दरबार में बाबा के,

बहती अमृत की धारा है,

पावन है वो धरती यहाँ साईं का डेरा है,

किस्मत का हो जाता वहा दूर अँधेरा है

उसे दिल से जो प्यार करे साईं उसका सहारा है,

बड़ा अद्भुत नजारा है दरबार में बाबा के,

है उसका नजारा तो कण कण में जलवा कर,

रहमत की नजर उसकी पड़ जाती है जिसपर,

दुःख उसके दूर करे उसे जिसने पुँकारा है,

बड़ा अद्भुत नजारा है दरबार में बाबा के,

हर रोज तेरे दर पे आये लाखो सवाली है,

भर भर के ले जाते वो झोलियाँ खाली है,

लाखो के मुकधर को बाबा तूने सवारा है,

बड़ा अद्भुत नजारा है दरबार में बाबा के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।