तेरी शिरडी के दर्शन पाके

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी शिरडी के दर्शन पाके ओ बाबा मैं निहाल हो गया,

तेरी किरपा जो मिली मुझे बाबा मैं तो माला माल हो गया,

बहुत दिनों से बायकुल था मन मैं भी शिरडी जाऊ,

शिरडी पति को शीश झुका के पवन दर्शन पाउ,

तूने दर्शन जो अपने कराये साई जी कमाल हो गया,

तेरी शिरडी के दर्शन पाके.......

लाया गुलाबो की माला में लाया तुझको चदार,

दया आप की हो गई मुझपे ओ करूणा के सागर,

तूने श्रद्धा जो मेरी अपने मैं तो माला माल हो गया,

तेरी शिरडी के दर्शन पाके........

पुण्य कर्म होंगे जन्मो के जुड़ गया तुमसे नाता,

करना जुड़ा न अब चरणों से हमको अपने दाता,

मुझको चरणों से अपने लगाया,मैं तो खुश हाल हो गया,

तेरी शिरडी के दर्शन पाके..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।