बाज़ मेरे गोबिंद दा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हवा च उड़दा जावे बाज़ मेरे गोबिंद दा,

सतनाम वाहेगुरु गावे बाज़ मेरे गोविन्द दा,

पिता गुरा दा तेग बहादुर,

तेग बहादुर हिन्द दी चादर,

माता गुजारी गाये बाज मेरे गोविन्द दा,

सतनाम सतनाम जी वाहेगुरु वाहेगुरु जी,

जनम गुरा दा पटना साहिब तो,

गुरा दा पटने साहिब दा,

आनंदपुर डेरे लाये बाज़ मेरे गोविन्द दा

नाल गुरा दे पंज प्यारे,

पंज प्यारे लगदे प्यारे,

शेवे आप सहाये,

बाज़ मेरे गोविन्द दा,

पेरी गुरा दे मखमल जोड़ा,

हेठ गुरा दे नीला गोडा,

हाथ विच बाज सजाये,

हवा च उड़दा जावे बाज़ मेरे गोबिंद दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।